Ek Prashna
ज़िन्दगी की इस मोड़ पर आज मुझे दुःख भी है और गुस्सा भी।
दुःख इस बात की हैं की गुरु की आश्रम में ज्ञान सीखने निकले बालक को वक़्त से पहले ही बुलाना पड़ा हैं और गुस्सा इस बात की हैं की हर रोज उस बालक को एक ही बातों के लिए बार बार अपनी ज्ञान से समझौता कर बुलाने की जोड़ किया जा रहा हैं ।
तकलीफ इस कारण हैं कि आज में इस समय गुरु और शिक्षक में अंतर नही कर पा रहा और नही किसीका चुनाब कर पा रहा ।
क्या कोई बात सकता हैं गुरु और शिक्षक में क्या अंतर हैं ।
आधी जीवन बिताने के बाद किसका चुनाब करना उचित हैं ।
कृपया उत्तर की आशा रहेगी ।

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